अब खेती होगी कम खर्चीली, वित्त मंत्री निर्मला ने किया ‘नैनो डीएपी’ का ऐलान!

Nandani Goswami
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भारत में किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि को आसान बनाने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। अंतरिम बजट में निर्मला सीतारमण ने एक महत्वपूर्ण ऐलान किया है। जिसमे उन्होंने पूरे देश में ‘नैनो डीएपी’ का इस्तेमाल करने की बात कही है। बजट स्पीच के दौरान वित्त मंत्री ने कृषि व्यवस्था में सुधार लाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘नैनो डीएपी’ को बढ़ावा देने के लिए कहा है। खेती में मिट्टी की अहम भूमिका होती है। अगर मिट्टी की फर्टिलिटी अच्छी रहेगी तो पैदावार भी बढ़िया होगी। भारत में किसान मिट्टी की फर्टिलिटी बेहतर करने के लिए यूरिया और डीएपी जैसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं। मौजूदा समय में नैनो यूरिया का भी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ‘नैनो डीएपी’ किसानों के लिए एक नई वस्तु हैं।

‘नैनो डीएपी’ का पूरा नाम ‘नैनो डाई-अमोनियम फॉस्फेट’ है। भारतीय किसान उत्पादक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) इसे डिवेलप कर रहा है। यह एक नौनो टेक्नोलॉजी आधारित कृषि उत्पादक है। पारंपरिक बोरे वाली दानेदार खाद में 18 फ़ीसदी नाइट्रोजन और 46 फ़ीसदी फास्फोरस होती थी, इसकी तुलना में नैनो डीएपी में 8% नाइट्रोजन और 16% फास्फोरस की मात्रा रहेगी। और यह एक स्पष्ट खाद है, जिसके जरिए फसलों को नाइट्रोजन और फास्फोरस उचित मात्रा में दिया जाता है। यह पारंपरिक उत्पादक की तुलना में बजट फ्रैंडली होगी और किसानों को कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे। यह लिक्विड खड़ी फसलों में नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी को ठीक करने में सहायता करता हैं।

'नैनो डीएपी' का पूरा नाम 'नैनो डाई-अमोनियम फॉस्फेट' है।

वित्त मंत्री ने कहा, सरकार 5 एकीकृत एक्वा पार्क खोलेगी। सरसों, मूंगफली खेती को सरकार और प्रोत्साहन देगी और मत्स्य योजना को बढ़ावा देने के लिए और काम किया जाएगा। कृषि के लिए मॉर्डन स्टोरेज, सप्लाई चेन पर फोकस किया जाएगा। डेयरी किसानों की मदद के लिए सरकार योजना लाएगी। और सभी इलाकों में नैनो DAP का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। इस इनोवेशन का उद्देश्य पारंपरिक डीएपी को बदलना है, जो किसानों के लिए किफायती विकल्प प्रदान करना है, क्योंकि पारंपरिक डीएपी का 50 किलो बैग अभी ₹1,350 है, और दूसरी तरफ, नैनो डीएपी की 500 ml की बॉटल 600 रुपये में आती है। इफको के मुताबिक, एक एकड़ की फसल में 250 ml-500 ml नैनो डीएपी का स्प्रे किया जाता है।

विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में नैनो डैप के उपयोग का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित करना एक सकारात्मक प्रयास है। यह लिक्विड उत्पादक की क्षय,सब्सिडी बजट और आयात की आवश्यकताओं को कम करते समय फसल रिटर्न को बढ़ाने की उम्मीद करता है। स्पष्ट रूप में नैनो डैप का प्रयोग करना भूमि के लिए अच्छा है क्योंकि यह ज्यादा प्रदूषित नहीं करता। किसानों को नैनो डीएपी और तरल यूरिया जैसे तरल उर्वरकों में स्विच करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है क्योंकि यह अपने क्षेत्रों में पृथ्वी की संख्या बढ़ाने में मदद करता है। यह फसल उत्पादन या आमदनी को नुकसान पहुंचाए बिना प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देता है

स्पष्ट उत्पादक के उपयोग को प्रोत्साहित करके, इस पहल का उद्देश्य कृषि भूमि को संरक्षित करना है। यह विशेष रूप से भारत जैसे देश में महत्वपूर्ण है, जहां 60 प्रतिशत आबादी अभी भी कृषि और संबंधित गतिविधियों में लगी हुई है। यह प्रयास क्रांतिकारी के रूप में देखा जाता है, जो खाद्य उत्पादन और उर्वरकों में भारत की आत्मनिर्भरता में योगदान देता है। नैनो डीएपी के कण का आकार 100 नैनोमीटर से कम होता है। इसकी खासियत यह है कि इससे जड़ों और पौधों को लाभ मिलता है। नैनो डीएपी में नाइट्रोजन और फास्फोरस के नैनो क्लस्टर जैव-पॉलिमर और अन्य सहायक पदार्थों के साथ कार्यात्मक होते हैं।

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