क्या है ब्लू इकोनॉमी 2.0? जिसका वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया जिक्र।

Nandani Goswami
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट में कई बड़े एलान किये थे। इन एलानों के साथ वित्त मंत्री ने Blue Economy 2.0 इकोनॉमी को बढ़ावा देने की बात की थी। और 2024-25 में नीला अर्थव्यवस्था को पर्यावरण अनुकूल विकास पर जोर देने की बात कही गई थी। नीली अर्थव्यवस्था समुद्री संसाधनों का स्थायी और समावेशी तरीके से उपयोग करके आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की योजना है। नीली अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन और जलीय कृषि, समुद्री ऊर्जा, समुद्री खनिज संसाधन, समुद्री पर्यटन और समुद्री परिवहन जैसे विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं।

जानें क्या होती है ब्लू इकोनॉमी और ये महत्वपूर्ण क्यों है?

ब्लू इकोनॉमी एक तरह की इकोनॉमिक ऑपरच्यूनिटी है। इसकी कोई सटीक परिभाषा नहीं है। विश्व बैंक के मुताबिक, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के इर्द-गिर्द होने वाले आर्थिक क्रियाकलाप और व्यापार तंत्र की गतिविधियां ‘ब्लू इकोनॉमी’ हैं। हालांकि विश्व बैंक के अनुसार समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखने, आर्थिक विकास और बेहतर जीविका के लिए समुद्र के संसाधनों का स्थायी रूप से इस्तेमाल करना है।

ब्लू इकोनॉमी 2.0

यूरोपीय कमीशन इसके अधीन “महासागरों, समुद्रों और तटों से संबंधित सभी मानवीय आर्थिक गतिविधियों” को भी शामिल करता है। इस तरह नीली अर्थव्यवस्था का अर्थ मछली पालन से लेकर, तेल और खनिज उत्पादन, शिपिंग और समुद्री व्यापार, बंदरगाहों पर संचालित गतिविधियां, पर्यटन उद्योग जैसे आर्थिक क्रियाकलापों से है। इसके अलावा समुद्र के बीच सामरिक-रणनीतिक महत्व के ठिकानों का विकास भी इसका विस्तारित हिस्सा होता है। आसान भाषा में समझे तो समुद्र मे मौजूद संसाधन जैसे मछली, ऑयल, खनिज, गैस आदि का इस्तेमाल करना और नवीकरणीय ऊर्जा का प्रोडक्शन जैसी गतिविधियों की गणना ब्लू इकॉनमी में की जाती है।

ग्लोबल इकोनॉमी में क्या और कितना है नीली अर्थव्यवस्था का योगदान?

विश्व की अर्थव्यवस्था या ग्लोबल इकोनॉमी में हर वर्ष करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर का बड़ा योगदान समुद्र आधारित ब्लू इकोनॉमी के जरिए होता है। इस योगदान में सबसे बड़ी हिस्सेदारी समुद्री व्यवसाय की हैं। दुनियाभर में होने वाले व्यापार का 80 प्रतिशत समुद्र के रास्ते ही किया जाता है। इसके बाद मछली पालन का नंबर आता है। संख्या के मुताबिक विश्वभर में 35 करोड़ों लोगों की जीविका मत्स्यपालन पर टिकी हुई है।

साथ ही समुद्री अपतटीय क्षेत्रों में तेल उत्पादन भी ब्लू इकोनॉमी का ही एक हिस्सा है। दुनिया के कुल कच्चे तेल उत्पादन का करीब 34 प्रतिशत समुद्री अपतटीय क्षेत्रों से होता है। इस तरह देखें तो वैश्विक स्तर पर नीली अर्थव्यवस्था की कुल संपत्ति का आधार 24 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मछली पकड़ने और जलीय कृषि, शिपिंग, पर्यटन जैसी बाकी गतिविधियों के संयोजन से हर वर्ष कम से कम 2.5 ट्रिलियन डॉलर की रचना होती है।

नीली अर्थव्यवस्था 2.0 का उद्देश्य:-

नीली अर्थव्यवस्था 2.0 को सफल बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए एक मजबूत नीतिगत ढांचे की आवश्यकता होगी। इस ढांचे को समुद्री संसाधनों के स्थायी उपयोग के लिए सुनिश्चित करना चाहिए और सभी हितधारकों के लिए समान अवसर प्रदान करना चाहिए। इसे सफल बनाने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश की भी आवश्यकता होगी। और इस ब्लू इकोनॉमी 2.0 योजना का उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में सस्टेनिबिलिटी को विकसित करना है। और इसके अलावा इस योजना में तटीय जलीय कृषि और समुद्री कृषि के विस्तार पर भी फोकस किया जाएगा।

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